पानीपत
प्रदेश के सरकारी व निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिले के लिए एआइईईई के
आधार पर हरियाणा ऑनलाइन काउंसलिंग सोसाइटी ने प्रथम मेरिट सूची बृहस्पतिवार
देर शाम जारी कर दी।
सूची में सैकड़ों ऐसे छात्रों को दाखिले का अवसर मिल गया है, जिन्होंने
एआइईईई में जीरो अंक प्राप्त किए हैं। इसके बावजूद प्रदेश के कॉलेजों में
35 से 40 फीसद सीटें खाली रह गई हैं। यहां तक कि 12 अधिक निजी इंजीनियरिंग
कॉलेजों को आवंटित किए गए छात्रों की संख्या दस भी पार नहीं कर पाई है।
प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिले के लिए प्रथम मेरिट सूची जारी
होते ही निजी इंजीनियरिंग कॉलेज प्रबंधकों
के होश उड़ गए हैं। और तो और सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में विशेषकर विश्वविद्यालय कैंपस को छोड़ अन्य कॉलेजों की भी स्थिति अच्छी नहीं रही है। यहां तक कि प्रदेश के गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में उन छात्रों को भी जगह मिल गई है, जो एआइईईई के तहत नेशनल काउंसिलिंग के योग्य नहीं पाए गए थे। इतना ही नहीं आरक्षित वर्ग में तो बायो मेडिकल इंजीनियरिंग में आठ लाख से अधिक रैंक वाले छात्र को भी दाखिले का अवसर मिल गया है। यह स्थिति अकेले गुरु जंभेश्वर विवि की नहीं है। दीन बंधु विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विवि मुरथल हो, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय या एमडीयू रोहतक। कमोबेश सभी विश्वविद्यालयों की यही स्थिति है। प्रथम काउंसिलिंग में ही मेरिट का ग्राफ जीरो पर आने के बावजूद 35 से 40 फीसद सीटें खाली रहने से निजी इंजीनियरिंग कॉलेज संचालक नए सिरे से दाखिला समीकरण बनाने में जुट गए हैं। गत वर्ष प्रदेश में दाखिले के लिए चार चरणों में आयोजित की गई काउंसिलिंग के बाद भी प्रदेश की लगभग 20 फीसद सीटें खाली रह गई थीं। इस बारे में कोई भी अधिकारी कुछ भी आधिकारिक तौर पर बोलने से परहेज कर रहे हैं।
के होश उड़ गए हैं। और तो और सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में विशेषकर विश्वविद्यालय कैंपस को छोड़ अन्य कॉलेजों की भी स्थिति अच्छी नहीं रही है। यहां तक कि प्रदेश के गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में उन छात्रों को भी जगह मिल गई है, जो एआइईईई के तहत नेशनल काउंसिलिंग के योग्य नहीं पाए गए थे। इतना ही नहीं आरक्षित वर्ग में तो बायो मेडिकल इंजीनियरिंग में आठ लाख से अधिक रैंक वाले छात्र को भी दाखिले का अवसर मिल गया है। यह स्थिति अकेले गुरु जंभेश्वर विवि की नहीं है। दीन बंधु विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विवि मुरथल हो, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय या एमडीयू रोहतक। कमोबेश सभी विश्वविद्यालयों की यही स्थिति है। प्रथम काउंसिलिंग में ही मेरिट का ग्राफ जीरो पर आने के बावजूद 35 से 40 फीसद सीटें खाली रहने से निजी इंजीनियरिंग कॉलेज संचालक नए सिरे से दाखिला समीकरण बनाने में जुट गए हैं। गत वर्ष प्रदेश में दाखिले के लिए चार चरणों में आयोजित की गई काउंसिलिंग के बाद भी प्रदेश की लगभग 20 फीसद सीटें खाली रह गई थीं। इस बारे में कोई भी अधिकारी कुछ भी आधिकारिक तौर पर बोलने से परहेज कर रहे हैं।


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ANIL KUMAR
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