Friday, July 13, 2012

JALD SATHAPIT HOGA SAMANVAY

हिसार। सुधार के लिए संवाद की महत्ता को समझते हुए प्रदेश सरकार ने अब स्कूली शिक्षा की जड़ता तोड़ने का फैसला लिया है। शिक्षा विभाग के निदेशक स्तरीय सात उच्चाधिकारी शिक्षा की राह में आने वाले व्यवधान की जानकारी पंचायत से लेकर जिला अधिकारियों तक संवाद के जरिये जुटाएंगे। और फिर उसे विभागीय वित्तीय सचिव तक पहुंचाएंगे। असल में, स्कूली शिक्षा विभाग के अधीन अभी तीन निदेशालय कार्यरत हैं- पहली से आठवीं तक के लिए मौलिक शिक्षा निदेशालय, नौवीं से बारहवीं के लिए वरिष्ठ माध्यमिक निदेशालय
और सर्वशिक्षा व राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा निदेशालय। विभाग ने महसूस किया है कि आइएएस अधिकारी की अगुवाई वाले इन तीनों निदेशालयों के बीच तालमेल का अभाव है। शिक्षा से जुड़े प्रोग्राम व योजनाओं के क्रियान्वयन में समन्वय तथा शिकायत निवारण का तंत्र कमजोर हो रहा है। शिक्षा विभाग की वित्त सचिव सुरीना राजन ने आदेश जारी किया है कि विभागीय वरिष्ठ अधिकारी इन मामलों का फील्ड सुपरविजन करेंगे।

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