अब तदर्थ से नियमित हुए शिक्षकों को उनके तदर्थ कार्यकाल का लाभ भी
मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शिक्षा विभाग ने याचिकाकर्ताओं को
उनके तदर्थ कार्यकाल का लाभ देते हुए उनकी नई वरिष्ठता सूची जारी की है।
वर्ष 2003 में तदर्थ से नियमित हुए शिक्षकों ने विभाग से उन्हें तदर्थ
कार्यकाल का लाभ देने की मांग की थी, लेकिन विभाग ने यह कहकर मना कर दिया
था कि यह नियमों के खिलाफ है। विभाग का कहना था किसी भी शिक्षक की नियमित
भर्ती की तिथि से ही उसकी सर्विस काउंट की जाती है। इस नियम के चलते सर्विस
में उनका तदर्थ कार्यकाल नहीं जोड़ा जा सकता। इसके बाद शिक्षकों ने यह
कहते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया कि उनकी भर्ती(तदर्थ के तौर पर) की
तिथि से उनकी सर्विस काउंट की जाए। हाईकोर्ट ने
शिक्षकों के पक्ष में फैसला सुनाया। सरकार ने हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी।
मगर सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के फैसले को ठीक ठहराते हुए शिक्षकों की मांग को सही ठहराया। सुप्रीम कोर्ट ने इसे लागू करते हुए तीन महीने के अंदर सरकार को जवाब देने को भी कहा, लेकिन जब महीने बाद भी सरकार ने इस फैसले को लागू नहीं किया, तो याचिकाकर्ताओं ने सरकार पर कोर्ट की अवमानना का केस दायर कर दिया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 20 जुलाई को सरकार को कोर्ट की अवमानना का नोटिस जारी किया। इस नोटिस के बाद डायरेक्टर ऑफ स्कूल एजुकेशन ने कहा कि उन्हें इस फैसले पर कोई आपत्ति नहीं है अब विभाग ने याचिकाकर्ताओं की एक जनवरी 2006 के आधार पर नई वरिष्ठता सूची जारी की है।
शिक्षकों के पक्ष में फैसला सुनाया। सरकार ने हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी।
मगर सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के फैसले को ठीक ठहराते हुए शिक्षकों की मांग को सही ठहराया। सुप्रीम कोर्ट ने इसे लागू करते हुए तीन महीने के अंदर सरकार को जवाब देने को भी कहा, लेकिन जब महीने बाद भी सरकार ने इस फैसले को लागू नहीं किया, तो याचिकाकर्ताओं ने सरकार पर कोर्ट की अवमानना का केस दायर कर दिया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 20 जुलाई को सरकार को कोर्ट की अवमानना का नोटिस जारी किया। इस नोटिस के बाद डायरेक्टर ऑफ स्कूल एजुकेशन ने कहा कि उन्हें इस फैसले पर कोई आपत्ति नहीं है अब विभाग ने याचिकाकर्ताओं की एक जनवरी 2006 के आधार पर नई वरिष्ठता सूची जारी की है।


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ANIL KUMAR
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