Monday, June 25, 2012

NAHI HAI GOVT. SCHOOLS ME EDUCATION KA MAHOL

चंडीगढ़ : हरियाणा के सरकारी स्कूलों का परीक्षा परिणाम इस बार भले ही सुकून देने वाला है, लेकिन प्रदेश के ज्यादातर सरकारी स्कूल विद्यार्थियों को अपनी तरफ आकर्षित करने में विफल साबित हुए हैं। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी और शिक्षकों के प्रति शिक्षा विभाग की संवेदनशीलता में कमी को इसका कारण माना जा रहा है। प्रदेश के करीब 25 लाख विद्यार्थी सरकारी स्कूलों में पढ़ाई कर रहे हैं। इनमें 18 लाख ऐसे हैं, जो राज्य सरकार की ओर से दी जाने वाली वित्तीय सहायता हासिल करने के लिए ही स्कूल जाते हैं। सरकारी स्कूलों में करीब 30 हजार शिक्षकों की कमी है। प्रदेश में इस साल 100 स्कूल सिर्फ इसलिए बंद करने पड़े हैं, क्योंकि उनमें विद्यार्थियों की संख्या अपेक्षित नहीं है। दूसरा पहलू यह है कि प्रदेश में शिक्षा का अधिकार कानून लागू हुए काफी समय बीत गया है, लेकिन राज्य के निजी स्कूलों में अभी भी 25 प्रतिशत सीटों पर गरीब बच्चों को दाखिला नहीं मिल पा रहा। हाई कोर्ट की हिदायतों के बावजूद राज्य सरकार निजी स्कूल संचालकों पर गरीब बच्चों को 25 प्रतिशत सीटों पर दाखिलों के लिए दबाव नहीं बना पाई है। अलबत्ता शिक्षा मंत्री ने मार्च 2013 तक शिक्षा का अधिकार कानून को लागू कर जिला शिक्षा अधिकारियों को रिपोर्ट भेजने का निर्देश जरूर दिया है। हाल ही में मुख्यमंत्री ने सोनीपत के राई में एक साथ दस शिक्षण संस्थाओं की आधारशिला रखी है। राज्य में तीन सरकारी मेडिकल कॉलेजों के निर्माण की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन धीमी गति है। राज्य सरकार और शिक्षक संगठनों के बीच इस मुद्दे पर अक्सर टकराव रहता है। प्रदेश की शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल का कहना है कि स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए राज्य सरकार ने विशाल बुनियादी ढांचा खड़ा किया है। सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता राज्य के लिए सघन निगरानी क्षेत्र में रहेगी।

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