मास्टर व सीएंडवी टीचर भी अब रेशनेलाइजेशन के दायरे में आएंगे। मौलिक
शिक्षा निदेशालय ने फरमान जारी कर सरकारी स्कूलों से छात्र व मास्टरों की
संख्या का ब्योरा मांगा है। शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए निदेशालय
ने यह कदम उठाया है।
शिक्षा अधिकार अधिनियम के तहत छात्र व शिक्षकों की संख्या का अनुपात ठीक
करने के लिए मौलिक शिक्षा निदेशालय ने रेशनेलाइजेशन प्रक्रिया शुरू की है।
आला अधिकारियों की देखरेख में पहले चरण में जेबीटी शिक्षकों का
रेशनेलाइजेशन किया गया। निदेशालय के
अधिकारियों ने अब दूसरे चरण में मास्टर मिस्ट्रेस (क्लासिकल एंड वर्नाकुलर) के रेशनेलाइजेशन की योजना तैयार की है। बीते 26 जून को निदेशालय में बुलाई गई बैठक में आला अधिकारियों ने फरमान जारी कर डीईओ व डीईईओ से स्कूल वाइज छात्र व टीचर की संख्या भेजने का आदेश दिया है। निदेशालय से शिक्षक व छात्र की संख्या को सुव्यवस्थित करने के लिए रेशनेलाइजेशन (वैज्ञानिकीकरण) की प्रक्रिया शुरू की गई है। छठी से आठवीं कक्षा में 35 छात्रों पर एक सेक्शन बनेगा। जिस स्कूल में छात्र संख्या के मुकाबले अधिक शिक्षक पाए गए, उन्हें दूसरे स्कूलों में भेजा जाएगा। जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सरोज बाला गुर का कहना है कि निदेशालय की हिदायत पर खंड शिक्षा अधिकारियों को मिडिल स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या व मास्टर का डाटा एकत्र कर भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
अधिकारियों ने अब दूसरे चरण में मास्टर मिस्ट्रेस (क्लासिकल एंड वर्नाकुलर) के रेशनेलाइजेशन की योजना तैयार की है। बीते 26 जून को निदेशालय में बुलाई गई बैठक में आला अधिकारियों ने फरमान जारी कर डीईओ व डीईईओ से स्कूल वाइज छात्र व टीचर की संख्या भेजने का आदेश दिया है। निदेशालय से शिक्षक व छात्र की संख्या को सुव्यवस्थित करने के लिए रेशनेलाइजेशन (वैज्ञानिकीकरण) की प्रक्रिया शुरू की गई है। छठी से आठवीं कक्षा में 35 छात्रों पर एक सेक्शन बनेगा। जिस स्कूल में छात्र संख्या के मुकाबले अधिक शिक्षक पाए गए, उन्हें दूसरे स्कूलों में भेजा जाएगा। जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सरोज बाला गुर का कहना है कि निदेशालय की हिदायत पर खंड शिक्षा अधिकारियों को मिडिल स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या व मास्टर का डाटा एकत्र कर भेजने के निर्देश दिए गए हैं।


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ANIL KUMAR
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