नेट की परीक्षा के लिए आवेदन करने वाले विद्यार्थियों ने बताया कि पहले नेट की परीक्षा में विस्तृत नॉलेज की जरूरत पड़ती थी। इसका कारण ज्यादा लिखना होता था। कई बार तो प्रश्रपत्र पूरा भी हल नहीं हो पाता था। ऑब्जेक्टिव प्रश्र आने से कम नॉलेज में भी काम चल जाएगा। इससे विषय के बारे में हल्की जानकारी होने पर भी विकल्पों को देखकर उत्तर मिल जाएगा। नेट की परीक्षा दे चुके सुखबीर व बलबीर ने बताया कि नेट की परीक्षा में सब्जेक्टिव प्रश्र होने से बहुत ज्यादा लिखना पड़ता था। कई प्रश्न जल्दी ना लिख पाने के कारण छूट भी जाते थे।
नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट (नेट) की परीक्षा का बदला रूप विद्यार्थियों को खूब भा रहा है। पिछली बार जहां महज नौ हजार विद्यार्थियों ने नेट परीक्षा के लिए आवेदन किया था वहीं इस बार यह
आंकड़ा १५७८५ तक पहुंच गया है। नेट परीक्षा के लिए बढ़े इन आवेदनों का मुख्य कारण इस बार परीक्षा में किए बदलाव को माना जा रहा है। जिसके चलते सभी योग्य विद्यार्थी अपनी किस्मत को आजमाने के लिए इस परीक्षा को देना चाहते हैं। ताकि वे भी लेक्चरर बनने की योग्यता को प्राप्त कर सकें। इतना ही नहीं नेट की परीक्षा में नाकाम रहने वाले विद्यार्थियों में भी इस बार ऑब्जेक्टिव पैटर्न से जोश भरा हुआ है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि नेट की परीक्षा में किए गए इस नए प्रयोग के क्या परिणाम सामने आते हैं। फिलहाल नेेट परीक्षा का बदला यह रूप आवेदकों को आकर्षित करने में जरूर कामयाब रहा है।
नहीं आ पाएगी गहराई : नेट की परीक्षा पास कर चुके अभिषेक गोयल व कुलदीप ने बताया कि यह ठीक है कि विद्यार्थियों को ऑब्जेक्टिव प्रश्रों के चलते ज्यादा लिखना नहीं पड़ेगा। लेकिन विकल्पों के कारण परीक्षार्थियों की गहरी नॉलेज का नहीं पता चल पाएगा जोकि सब्जेक्टिव परीक्षा में ही पता चल सकता है। अभिषेक गोयल ने कहा कि अभी इस नए पैटर्न के आधार पर होने वाली परीक्षा के परिणाम बताएंगे कि नया प्रयोग कैसा रहा। इसके लिए हमें परीक्षा परिणाम का इंतजार करना पड़ेगा। हालांकि लेक्चरर बनने की योग्यता पाना आसान हो जाएगा। कुलदीप सिंह ने कहा कि एक शिक्षक को विस्तृत जानकारी होनी चाहिए। खासकर जब हम बात उच्च शिक्षा की करते हैं लेकिन इस नए प्रयोग से वह विस्तृत जानकारी कहीं खो जाएगी।
नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट (नेट) की परीक्षा का बदला रूप विद्यार्थियों को खूब भा रहा है। पिछली बार जहां महज नौ हजार विद्यार्थियों ने नेट परीक्षा के लिए आवेदन किया था वहीं इस बार यह
आंकड़ा १५७८५ तक पहुंच गया है। नेट परीक्षा के लिए बढ़े इन आवेदनों का मुख्य कारण इस बार परीक्षा में किए बदलाव को माना जा रहा है। जिसके चलते सभी योग्य विद्यार्थी अपनी किस्मत को आजमाने के लिए इस परीक्षा को देना चाहते हैं। ताकि वे भी लेक्चरर बनने की योग्यता को प्राप्त कर सकें। इतना ही नहीं नेट की परीक्षा में नाकाम रहने वाले विद्यार्थियों में भी इस बार ऑब्जेक्टिव पैटर्न से जोश भरा हुआ है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि नेट की परीक्षा में किए गए इस नए प्रयोग के क्या परिणाम सामने आते हैं। फिलहाल नेेट परीक्षा का बदला यह रूप आवेदकों को आकर्षित करने में जरूर कामयाब रहा है।
नहीं आ पाएगी गहराई : नेट की परीक्षा पास कर चुके अभिषेक गोयल व कुलदीप ने बताया कि यह ठीक है कि विद्यार्थियों को ऑब्जेक्टिव प्रश्रों के चलते ज्यादा लिखना नहीं पड़ेगा। लेकिन विकल्पों के कारण परीक्षार्थियों की गहरी नॉलेज का नहीं पता चल पाएगा जोकि सब्जेक्टिव परीक्षा में ही पता चल सकता है। अभिषेक गोयल ने कहा कि अभी इस नए पैटर्न के आधार पर होने वाली परीक्षा के परिणाम बताएंगे कि नया प्रयोग कैसा रहा। इसके लिए हमें परीक्षा परिणाम का इंतजार करना पड़ेगा। हालांकि लेक्चरर बनने की योग्यता पाना आसान हो जाएगा। कुलदीप सिंह ने कहा कि एक शिक्षक को विस्तृत जानकारी होनी चाहिए। खासकर जब हम बात उच्च शिक्षा की करते हैं लेकिन इस नए प्रयोग से वह विस्तृत जानकारी कहीं खो जाएगी।


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ANIL KUMAR
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