Thursday, April 12, 2012

SPECIAL EDITORIAL ABOUT RELIEF IN HTET BY ANILRATIA

THIS IS THE NEWS WHICH BECOME THE BASE OF REGULARIZATION IN DIFFERENT STATES.TET HAR STATE KO HAR SAAL CONDUCT KARNA HOGA.
YE KAHTI HAI KI 
"यह तय करने का अधिकार राज्यों का होगा कि शिक्षा मित्र आरटीई नियमों के तहत निर्धारित योग्यता और प्रशिक्षण स्थायी नियुक्ति से पहले हासिल करें या इसके बाद।"
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अब यह पूरी तरह राज्यों पर निर्भर करेगा कि वह इन्हें कब और किस रूप में स्थायी करती हैंशिक्षा 
*मित्रों को चूंकि कामकाजी शिक्षक का दर्जा प्राप्त है लिहाजा उन्हें स्थायी करने में कोई हर्ज नहीं। जहां तक आरटीई के नियमानुसार आवश्यक शिक्षा व प्रशिक्षण हासिल करने की बात है तो इसके लिए उन्हें मौका दिया जा सकता है। राज्य सरकारें उन्हें स्थायी होने के बाद या इसके पहले बीएड जैसी योग्यता प्राप्त करने को कह सकती हैं, लेकिन पांच साल की निर्धारित अवधि का ध्यान रखना होगा। 

STATE GOVT. CAHE TO RTE RULES KE UNDER GUEST TEACHERS KO BHI REGULAR KAR SAKTI HAI. ES ME NA HI KOI COURT AAGE AA SAKTI HAI KYUI KI KUD CENTRE GOVT. NE RTE RULE KE ANUSAR STATES KO KACCHE EMPLOYEES KO REGULAR KARNE KO KAHA HAI. JAB UP,HP,RAJASTHAN ME KACCHE EMPLOYEE REGULAR HO SAKTE HAI TO HARYANA KE LIYE KOI ALAG RULE NAHI HAI. UP,HP,RAJASTHAN YE SABHI BHARAT ME HAI .WAHAN BHI HIGH COURT HAI,WAHAN BHI TAANG KICHNE WALE HAI.AGAR WO REGULAR HO SAKTE HAI TO GUEST BHI HO SAKTE HAI. AGAR HARYANA GOVT. ME ICHASAKTI HAI TO WHO SAB KAR SAKTI HAI.DUSRO KE SUKH SE JALNE KI BAZAYE APNE LIYE SUKH TALASH KARNA CHAHIYE. THE RIGHT DEMAND WILL BE TO RECRUIT AS MUCH AS TEACHERS AFTER REGULARIZING GUEST TEACHERS.

THE NEWS WHICH BECOME BASE OF MY VIEWS IS BELOW WHICH PUBLISED IN AMAR UJALA  A YEAR AGO

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने लाखों शिक्षा मित्रों की स्थायी नियुक्ति की राह आसान कर दी है। उसका कहना है कि राज्य सरकारें चाहें तो शिक्षा के अधिकार कानून के तहत अपेक्षित योग्यता और अनिवार्य टेस्ट जैसी शर्तों पर खरा नहीं उतरने के बावजूद उनकी नौकरी पक्की कर सकती हैं। यह तय करने का अधिकार राज्यों का होगा कि शिक्षा मित्र आरटीई नियमों के तहत निर्धारित योग्यता और प्रशिक्षण स्थायी नियुक्ति से पहले हासिल करें या इसके बाद। राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने हाल में उत्तर प्रदेश, गुजरात व अन्य राज्यों से मिले प्रस्ताव पर विचार के बाद यह निर्णय लिया है।

राज्यों के प्रस्तावों को हरी झंडी दिखाने का फायदा देशभर में कार्यरत 5 लाख 40 हजार शिक्षा मित्रों को होगा, जो लंबे समय से स्थायी होने की आस लगाए बैठे हैं। अकेले उत्तर प्रदेश में इनकी संख्या डेढ़ लाख से ज्यादा (एक लाख 64 हजार) है, जबकि उत्तराखंड में 3 634, हरियाणा में 12833, हिमाचल प्रदेश में 9784, पंजाब में 1122, जम्मू-कश्मीर में 23626 और दिल्ली में इनकी संख्या 1140 है। अब यह पूरी तरह राज्यों पर निर्भर करेगा कि वह इन्हें कब और किस रूप में स्थायी करती हैं।एनसीटीई अध्यक्ष मोहम्मद अख्तर सिद्दीकी ने कहीं राजनीतिक और कहीं सामाजिक आंदोलन की वजह बने इस मामले में सधा सा तर्क दिया कि शिक्षा मित्रों को चूंकि कामकाजी शिक्षक का दर्जा प्राप्त है लिहाजा उन्हें स्थायी करने में कोई हर्ज नहीं। जहां तक आरटीई के नियमानुसार आवश्यक शिक्षा व प्रशिक्षण हासिल करने की बात है तो इसके लिए उन्हें मौका दिया जा सकता है। राज्य सरकारें उन्हें स्थायी होने के बाद या इसके पहले बीएड जैसी योग्यता प्राप्त करने को कह सकती हैं, लेकिन पांच साल की निर्धारित अवधि का ध्यान रखना होगा।

एक अप्रैल को आरटीई लागू हुए एक साल बीत जाएगा। लिहाजा अगले चार साल में शिक्षकों को खुद को योग्य बनाना ही पड़ेगा।

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ANIL KUMAR
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