Tuesday, April 3, 2012

NO PHYSICAL PUNISHMENT IN SCHOOLS

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने देश में शिक्षा का अधिकार कानून को लागू करने के लिए शिकायत निवारण प्रणाली बनाने व स्कूल से लेकर केंद्र सरकार तक की जवाबदेही तय करने का सुझाव दिया है। आयोग ने कानून की कई खामियों को उजागर किया है। उसने स्कूलों व शिक्षण संस्थानों में शारीरिक दंड देने पर पाबंदी लगाने और बाल श्रम विरोधी कानून को आरटीई कानून के मुताबिक बनाने पर खासा जोर दिया है। देश में शिक्षा का अधिकार कानून की समीक्षा का अधिकार एनसीपीसीआर के पास है। साल 2010 में लागू किए गए इस कानून के दो साल पूरे होने पर आयोग ने अपनी समीक्षा रिपोर्ट में सरकार के शिक्षा का हक अभियान की तो सराहना की है, लेकिन इसकी कई कमियों की ओर भी इशारा किया है। आयोग ने बीते दो सालों में अपनी सोशल ऑडिट प्रक्रिया के तहत 12 राज्यों के 439 वार्ड व 700 स्कूलों के कामकाज का अध्ययन किया। इनमें 11 राज्यों में करीब 2500 मामलों की जन सुनवाई की गई। इस काम में उसने सौ से अधिक गैर सरकारी संगठनों की भी मदद ली। आयोग
का मानना है कि शिक्षा का अधिकार कानून प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए स्कूल से लेकर केंद्र सरकार को अपनी जवाबदेही सुनिश्चत करनी होगी। इसके अलावा ग्राम पंचायतों व शहरी निकायों को भी इसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी से जोड़ना होगा। आयोग ने भविष्य के लिए सुझाव देते हुए शिकायत निवारण प्रणाली लागू करने, बाल श्रम विरोधी कानून और राष्ट्रीय बाल श्रम कार्यक्रम को आरटीई कानून के मुताबिक बनाने को कहा है

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