राजकीय विद्यालयों में अप्रैल माह में पढ़ाई शायद ही शुरू हो पाए। शिक्षक
पहले दाखिलों में व्यस्त रहे, फिर फसल अवकाश के नाम पर पढ़ाई ठप हो गई। अब
उसके बाद शिक्षक शिक्षा बोर्ड की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में व्यस्त
हो जाएंगे। विद्यार्थियों के दाखिले के बाद से अब तक सरकारी स्कूलों में
पढ़ाई शुरू ही नहीं हो पाई है और सुचारू होने की संभावना भी नहीं है। यह
स्थिति बोर्ड व शिक्षकों के बीच हुई वार्ता विफलता के कारण पैदा हुई है।
अवकाश में जहां शिक्षकों ने बोर्ड परीक्षा की उत्तर-पुस्तिकाओं का
मूल्यांकन नहीं किया। अब उन उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन फसली अवकाश के
बाद स्कूल शुरू होने के बाद ही किया जाएगा। शिक्षक संगठन व अधिकारी भी यह
मान रहे हैं कि इससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होगी लेकिन हर कोई अपनी
बेचारगी भी दर्शा रहा है। इस बीच में निश्चित तौर पर प्रभावित बच्चे ही
होने वाले हैं। हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ संबंधित सर्व कर्मचारी संघ के
जिला प्रधान रघुनाथ महता का कहना है कि बोर्ड द्वारा यदि उनकी मांगें
स्वीकार नहीं की जाती है तब तक उत्तर-पुस्तिकाओं का मूल्यांकन शुरु नहीं
किया जाएगा। शिक्षकों के इस फैसले से बच्चों की पढ़ाई बाधित होने की स्थिति
बन गई है। शिक्षक स्वयं इस बात को मान रहे हैं कि स्कूल लगने के बाद
उत्तर-पुस्तिकाओं के मूल्यांकन शुरू होने से इसका नकारात्मक प्रभाव की
पढ़ाई पर पड़ेगा।


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ANIL KUMAR
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