उच्चतम न्यायालय ने
हरियाणा के सरकारी स्कूलों में नियुक्त करीब 16 हजार गेस्ट टीचर्स को करारा
झटका देते हुए नियमित नियुक्तियों के समय उन्हें पात्रता परीक्षा से छूट
देने संबंधी अर्जी खारिज कर दी है।
कोर्ट ने गेस्ट टीचर्स को नियुक्ति के लिए साक्षात्कार में उनके अनुभव के लिए 24 अंकों का अतिरिक्त अधिमान दिए जाने की दलील को भी अस्वीकार कर दिया है। फैसले के बाद इन गेस्ट टीचर्स को नियमित नियुक्ति के लिए आवेदन से पहले राज्य स्तरीय शिक्षक पात्रता परीक्षा अनिवार्य रूप से पास करनी होगी।
> कोर्ट ने कहा कि जब राज्य सरकार के शिक्षक भर्ती नियमों मेंं पात्रता परीक्षा पास करना अनिवार्य है तो कोर्ट इसमें भला कैसे हस्तक्षेप कर सकती है?
> कोर्ट ने कहा कि जो व्यक्ति पात्रता परीक्षा पास करने मे सक्षम नहीं है, उसे नियमों में ढील देकर कैसे शिक्षक भर्ती किया जा सकता है।
> नियमित नियुक्ति के लिए याचियों को पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता पूरी करनी ही होगी और इसमें किसी तरह की छूट संभव नहीं है।
> 24 अतिरिक्त अंक नहीं दे सकते। इससे अन्य प्रतिस्पर्धियों को बराबरी के अवसर नहीं मिल पाएंगे।
सरकार को भी लताड़ा
कोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाई और कहा कि यदि उसकी भर्ती नीति सही थी तो हाईकोर्ट में खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट क्यों नहीं आए। पीठ ने पूछा कि हेड मास्टरों द्वारा भर्ती शिक्षकों को रियायत देने के लिए बनाई गई नीति का क्या आधार था।
यह है मामला
सरकार ने 2005-2006 में गेस्ट टीचर नियुक्त किए थे। इन शिक्षकों ने परीक्षा से छूट, साक्षात्कार में 24 अंक व आयु में छूट मांगी थी। सरकार ने मांगे मानते हुए शिक्षक भर्ती नीति बना दी। हाईकोर्ट में यह नीति खारिज हो गई। सुप्रीम कोर्ट ने गेस्ट टीचर्स की अपील ठुकरा दी।
कोर्ट ने गेस्ट टीचर्स को नियुक्ति के लिए साक्षात्कार में उनके अनुभव के लिए 24 अंकों का अतिरिक्त अधिमान दिए जाने की दलील को भी अस्वीकार कर दिया है। फैसले के बाद इन गेस्ट टीचर्स को नियमित नियुक्ति के लिए आवेदन से पहले राज्य स्तरीय शिक्षक पात्रता परीक्षा अनिवार्य रूप से पास करनी होगी।
> कोर्ट ने कहा कि जब राज्य सरकार के शिक्षक भर्ती नियमों मेंं पात्रता परीक्षा पास करना अनिवार्य है तो कोर्ट इसमें भला कैसे हस्तक्षेप कर सकती है?
> कोर्ट ने कहा कि जो व्यक्ति पात्रता परीक्षा पास करने मे सक्षम नहीं है, उसे नियमों में ढील देकर कैसे शिक्षक भर्ती किया जा सकता है।
> नियमित नियुक्ति के लिए याचियों को पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता पूरी करनी ही होगी और इसमें किसी तरह की छूट संभव नहीं है।
> 24 अतिरिक्त अंक नहीं दे सकते। इससे अन्य प्रतिस्पर्धियों को बराबरी के अवसर नहीं मिल पाएंगे।
सरकार को भी लताड़ा
कोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाई और कहा कि यदि उसकी भर्ती नीति सही थी तो हाईकोर्ट में खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट क्यों नहीं आए। पीठ ने पूछा कि हेड मास्टरों द्वारा भर्ती शिक्षकों को रियायत देने के लिए बनाई गई नीति का क्या आधार था।
यह है मामला
सरकार ने 2005-2006 में गेस्ट टीचर नियुक्त किए थे। इन शिक्षकों ने परीक्षा से छूट, साक्षात्कार में 24 अंक व आयु में छूट मांगी थी। सरकार ने मांगे मानते हुए शिक्षक भर्ती नीति बना दी। हाईकोर्ट में यह नीति खारिज हो गई। सुप्रीम कोर्ट ने गेस्ट टीचर्स की अपील ठुकरा दी।


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ANIL KUMAR
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