Friday, February 10, 2012

SANSKRIT MAY BE MADE COMPLURY SUBJECT

हरियाणा संस्कृत अकादमी और पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ के संस्कृत विभाग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में संस्कृत भाषा को स्कूलों में अनिवार्य करने की वकालत की गई है। सम्मेलन के दौरान आधुनिक संस्कृत साहित्य-दशा और दिशा विषय पर विद्वानों ने विचार सांझा किए। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के
पूर्व कुलपति डॉ. रामगोपाल ने उद्घाटन भाषण में कहा कि किसी भी साहित्य की रक्षा उसके अध्ययन और अध्यापन से होती है। संस्कृत विश्व की सबसे प्रचीन एवं समृद्ध भाषा है। आज इसकी दिशा को बदलने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि संस्कृत को प्रोत्साहन दिए जाने से देश का नैतिक, चारित्रिक और बौद्धिक विकास होगा। डॉ. रामगोपाल ने कहा कि संस्कृत को आधुनिक विज्ञान व कंप्यूटर विषयों के साथ अनिवार्य रूप से पढ़ाया जाना चाहिए। इससे भौतिक विकास के साथ-साथ देश का नैतिक एवं बौद्धिक विकास होगा। अकादमी के निदेशक डॉ. सुधीर कुमार ने कहा कि हरियाणा संस्कृत अकादमी आधुनिक संस्कृत साहित्य के माध्यम से पा:ात्य संस्कृति के फैलते संक्रमण पर अंकुश लगाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए दिल्ली संस्कृत अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ. श्रीकृष्ण सेमवाल ने कहा कि संस्कृत विद्वानों को संस्कृत का आधुनिकीकरण करना चाहिए। हिमाचल विश्वविद्यालय के प्रो. वीरेंद्र सिंह व उत्तराखंड संस्कृत अकादमी के सचिव डॉ. बुद्धदेव शर्मा ने संस्कृत के उत्थान की दिशा में नीतिगत फैसले लिए जाने की जरूरत बताई। पंजाब विश्वविद्यालय के डॉ. वीरेंद्र कुमार अलंकार ने बताया कि डॉ. रामगोपाल संस्कृत विषय में प्रदेश के प्रथम पीएचडी हैं।

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