संसद की वित्तीय मामलों की स्थायी समिति के कुछ सदस्यों ने आयकर छूट की सीमा बढ़ाकर पांच लाख रुपए किए जाने पर जोर दिया है। वरिष्ठ भाजपा नेता यशवंत सिन्हा की अध्यक्षता वाली इस समिति की शुक्रवार को बैठक हुई।
इसमें कुछ सदस्यों ने महंगाई का हवाला देते हुए यह राय रखी। यह समिति प्रत्यक्ष कर संहिता (डीटीसी) विधेयक के प्रावधानों की पड़ताल कर रही है। समिति ने अपनी मसौदा रिपोर्ट में आयकर छूट की सीमा बढ़ाकर 3 लाख रुपए करने का सुझाव दिया है। फिलहाल यह सीमा 1.80 लाख रुपए है।
डीटीसी विधेयक लोकसभा में 2010 में पेश हुआ था। उसमें आयकर छूट की सीमा बढ़ाकर 2 लाख रुपए करने का प्रावधान है।
24 फरवरी को बैठक: सूत्रों ने बताया कि समिति ने डीटीसी पर अपनी विस्तृत रिपोर्ट को बजट से पहले 2 मार्च तक अंतिम रूप देने का निश्चय किया है। इसके लिए समिति 24 फरवरी और 2 मार्च को बैठक करेगी। देश में प्रत्यक्ष कर प्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए सरकार प्रत्यक्ष कर संहिता लागू करना चाहती है। इसे मौजूदा आयकर कानून 1961 की जगह अमल में आना है। सरकार डीटीसी विधेयक के अगले वित्त वर्ष तक संसद से पारित हो जाने की उम्मीद कर रही है।
लेकिन फिलहाल इसके लंबित होने के मद्देनजर इसके कुछ प्रावधान 16 मार्च को पेश होने वाले आम बजट में शामिल किए जा सकते हैं।
आयकर स्लैब में संशोधन का प्रस्ताव
डीटीसी विधेयक में आयकर के तीन स्लैब में भी संशोधन का प्रावधान है। फिलहाल 1.80 से 5 लाख रुपए तक आय पर कर की दर 10 प्रतिशत, 5 से 8 लाख पर 20 प्रतिशत और 8 लाख से अधिक आय पर 30 प्रतिशत है। डीटीसी विधेयक में 2 से 5 लाख रुपए तक की आय पर 10 प्रतिशत, 5 से 10 लाख रुपए की आय पर 20 प्रतिशत और 10 लाख से अधिक आय पर 30 प्रतिशत की दर से कर वसूलने का प्रस्ताव है।
इसमें कुछ सदस्यों ने महंगाई का हवाला देते हुए यह राय रखी। यह समिति प्रत्यक्ष कर संहिता (डीटीसी) विधेयक के प्रावधानों की पड़ताल कर रही है। समिति ने अपनी मसौदा रिपोर्ट में आयकर छूट की सीमा बढ़ाकर 3 लाख रुपए करने का सुझाव दिया है। फिलहाल यह सीमा 1.80 लाख रुपए है।
डीटीसी विधेयक लोकसभा में 2010 में पेश हुआ था। उसमें आयकर छूट की सीमा बढ़ाकर 2 लाख रुपए करने का प्रावधान है।
24 फरवरी को बैठक: सूत्रों ने बताया कि समिति ने डीटीसी पर अपनी विस्तृत रिपोर्ट को बजट से पहले 2 मार्च तक अंतिम रूप देने का निश्चय किया है। इसके लिए समिति 24 फरवरी और 2 मार्च को बैठक करेगी। देश में प्रत्यक्ष कर प्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए सरकार प्रत्यक्ष कर संहिता लागू करना चाहती है। इसे मौजूदा आयकर कानून 1961 की जगह अमल में आना है। सरकार डीटीसी विधेयक के अगले वित्त वर्ष तक संसद से पारित हो जाने की उम्मीद कर रही है।
लेकिन फिलहाल इसके लंबित होने के मद्देनजर इसके कुछ प्रावधान 16 मार्च को पेश होने वाले आम बजट में शामिल किए जा सकते हैं।
आयकर स्लैब में संशोधन का प्रस्ताव
डीटीसी विधेयक में आयकर के तीन स्लैब में भी संशोधन का प्रावधान है। फिलहाल 1.80 से 5 लाख रुपए तक आय पर कर की दर 10 प्रतिशत, 5 से 8 लाख पर 20 प्रतिशत और 8 लाख से अधिक आय पर 30 प्रतिशत है। डीटीसी विधेयक में 2 से 5 लाख रुपए तक की आय पर 10 प्रतिशत, 5 से 10 लाख रुपए की आय पर 20 प्रतिशत और 10 लाख से अधिक आय पर 30 प्रतिशत की दर से कर वसूलने का प्रस्ताव है।


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