अवकाश के बाद स्कूल खुलने के पहले दिन यातायात पुलिस और स्थानीय प्रशासन
ने जैसी मुस्तैदी दिखाई वह प्रशंसनीय तो है ही, चौंकाने वाली भी है। एक
साथ, एक ही दिन लगभग पांच सौ स्कूल वाहनों के चालान से एक बात तो स्पष्ट
हो गई कि अंबाला हादसे में 13 बच्चों की मौत के बाद प्रशासन अलर्ट हो गया।
चौकाने वाली बात यह है कि अंबाला में पिछले छह माह के दौरान स्कूल वाहनों
के 268 चालान नहीं किए गए लेकिन एक ही दिन में हो गए। पानीपत में 66, कैथल
में 54, करनाल में 57 वाहनों पर कार्रवाई हुई। इन तीनों जिलों में पिछले
छह माह का आंकड़ा देखा जाए तो वह इससे कम होगा। ऐसा नहीं कि स्कूल वाहन
पहले दुर्घटनाग्रस्त नहीं होते थे। हर दिन औसतन पांच वाहन हादसों का शिकार
होते थे परंतु प्रशासन को शायद किसी बड़े हादसे का इंतजार था। कायदे से
पूरी व्यवस्था ही संक्रमित होकर घिसटती रही। ठीक वैसे ही जैसे बीमारी लंबी
होने के कारण मरीज तकलीफ का आदी हो जाता है। अंबाला हादसे के बाद ही इस
बीमारी का अहसास हो पाया। ट्रैफिक पुलिस की तत्परता से लग तो यही रहा है
कि वह इस बीमारी को रातों-रात ठीक करना चाहती है परंतु यह संभव नहीं। हां,
एक और आशंका पैदा हो रही है कि निजी स्कूल पुलिस वालों की नियमित अतिरिक्त
आमदनी का
जरिया न बन जाएं। प्रदेश में हजारों प्राइवेट स्कूलों में वाहनों के मानक पूरे करने में लंबा समय लगेगा। ड्राइवरों के लाइसेंस और शिक्षा व शिष्टाचार का स्तर ऊंचा करने में खासी मेहनत करनी होगी। स्कूल संचालकों को समझना होगा कि अब पुराने ढर्रे पर उनकी गाड़ी अधिक दिनों तक चलने वाली नहीं। क्रमबद्ध तरीके से स्कूल परिवहन व्यवस्था का कायाकल्प करके मानकों के अनुरूप बनाया जाए। वर्षो से सोई ट्रैफिक पुलिस को जागने के बाद तत्परता, मुस्तैदी से अपने दायित्व का पालन करना होगा, आक्रामकता से लक्ष्य दिशाहीन हो सकता है। हर दिन सभी स्कूल वाहनों का चालान काटने या कुछ को इंपाउंड करने से प्रशासन को विरोध झेलना पड़ सकता है, स्कूलों में उपस्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की पूरी आशंका रहेगी। विरोध प्रदर्शन करके स्कूल संचालक प्रशासन पर दबाव बनाने की कोशिश भी कर सकते हैं।
जरिया न बन जाएं। प्रदेश में हजारों प्राइवेट स्कूलों में वाहनों के मानक पूरे करने में लंबा समय लगेगा। ड्राइवरों के लाइसेंस और शिक्षा व शिष्टाचार का स्तर ऊंचा करने में खासी मेहनत करनी होगी। स्कूल संचालकों को समझना होगा कि अब पुराने ढर्रे पर उनकी गाड़ी अधिक दिनों तक चलने वाली नहीं। क्रमबद्ध तरीके से स्कूल परिवहन व्यवस्था का कायाकल्प करके मानकों के अनुरूप बनाया जाए। वर्षो से सोई ट्रैफिक पुलिस को जागने के बाद तत्परता, मुस्तैदी से अपने दायित्व का पालन करना होगा, आक्रामकता से लक्ष्य दिशाहीन हो सकता है। हर दिन सभी स्कूल वाहनों का चालान काटने या कुछ को इंपाउंड करने से प्रशासन को विरोध झेलना पड़ सकता है, स्कूलों में उपस्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की पूरी आशंका रहेगी। विरोध प्रदर्शन करके स्कूल संचालक प्रशासन पर दबाव बनाने की कोशिश भी कर सकते हैं।


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ANIL KUMAR
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