हिसार बालिकाओं का शिक्षा स्तर सुधारने के लिए सर्व शिक्षा अभियान के सहयोग से शुरू किए जा रहे कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय कागजों तक सिमट कर रह गए हैं। इस केंद्रीय योजना के तहत शैक्षिक रूप से पिछड़े क्षेत्रों में छठी से आठवीं कक्षा की बालिकाओं को आधुनिक शिक्षा देने के लिए 27 आवासीय स्कूलों की नींव रखी गई थी। योजना इसी वर्ष से शुरू होनी थी, सरकार ने जनवरी माह में सूचना भी जारी कर दी थी लेकिन योजना को मूर्त रूप देना संभव नहीं लगता। अधिकतर जगहों पर इन स्कूलों के
लिए निशानदेही भी नहीं हुई है। खंड जिला शिक्षा अधिकारी नीता अग्रवाल ने बताया कि फिलहाल हमारे पास इन स्कूलों के बारे में कोई विशेष जानकारी नहीं है। पिछले दिनों सूचना मिली थी कि इन स्कूलों में बालिकाओं को पढ़ाने के लिए स्वयं सहायता समूह की मदद ली जाएगी। उन्हीं के सहयोग से छात्राओं को शिक्षा सहित अन्य सुविधाएं प्रदान की जाएगी।
लिए निशानदेही भी नहीं हुई है। खंड जिला शिक्षा अधिकारी नीता अग्रवाल ने बताया कि फिलहाल हमारे पास इन स्कूलों के बारे में कोई विशेष जानकारी नहीं है। पिछले दिनों सूचना मिली थी कि इन स्कूलों में बालिकाओं को पढ़ाने के लिए स्वयं सहायता समूह की मदद ली जाएगी। उन्हीं के सहयोग से छात्राओं को शिक्षा सहित अन्य सुविधाएं प्रदान की जाएगी।


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